ईमानदार लकड़हारा – moral stories for students in hindi.

ईमानदार लकड़हारा – moral stories for students in hindi.

हैल्लो दोस्तों आपका फिर से स्वागत है। हमारे एक और नई और इंट्रेस्टिंग पोस्ट में जिसमे आज हम आपको ईमानदार लकड़हारा – moral stories for students in hindi.सुनाएंगे जो की आपको बहुत पसंद आएगी अगर आपको पसंद आये तो ज़रूर हमे कमेंट कर के बताना। तो चलिए शुरू करते है। आज की ये moral story .

ईमानदार लकड़हारा - moral stories for students in hindi.

दोस्तों ये कहानी है एक ईमानदार लकड़हारे की जो की बहुत ईमानदार होता है। एक गाँव में 2 लकड़हारे रहते थे। जिसमे एक का नाम सुरेश और दूसरे का नाम महेश था। सुरेश एक ईमानदार और मेहनती लकड़हारा था। बही महेश आलसी और लालची था। दोनों का घर वार लकड़ी काट कर चलता था। इसलिए दोनों लोग लकड़ी काटने जाते थे।

एक दिन सुबह – सुबह सुरेश लकड़ी काटने जा रहा था। रस्ते में महेश मिला सुरेश ने महेश से कहा चलो लकड़ी काटने चलते है महेश ने हस कर जवाब दिया की इतनी सुबह मैं लकड़ी काटने नहीं जाऊंगा तुम ही जाओ।

और फिर सुरेश चला गया। सुरेश एक पेड़ पर चढ़ा लकड़ी काटने के लिए तो उससे उस पेड़ पर लकड़ी नहीं मिली उसने सोचा की नदी के पास पेड़ लकड़ी काट लेते है। उस पेड़ पर लकड़ी भी बहुत है।

सुरेश नदी के पास गया और पेड़ पर चढ़ कर लकड़ी काटने लगा। अचानक सुरेश के हाँथ से उसकी कुल्हाड़ी छूट गई और नदी में जा गिरी। अब सुरेश बहुत परेशान था की क्या करू सुरेश रोने लगा और ईश्वर से हाँथ जोड़ कर मांगने लगा।

अचानक से नदी में से एक लक्ष्मी निकली और बोली क्या हुआ बेटे तभी सारी बात सुरेश ने लक्ष्मी को बताई लक्ष्मी ने कहा परेशान मत हो। मैं ला कर दूंगी तुम्हारी कुलहरि लक्ष्मी ने पानी में डुबकी लगाई और एक सोने की कुल्हाड़ी बहार निकाली सुरेश देख कर बहुत खुश हुआ। लक्ष्मी ने पूंछा ये तुम्हारी कुल्हाड़ी है सुरेश ने जवाब दिया नहीं ये मेरी कुल्हाड़ी नहीं है। मेरी कुल्हाड़ी तो लोहे की थी।

लक्ष्मी ने फिर पानी में डुबकी लगाई और अबकी चांदी की कुल्हाड़ी लेकर आयी और सुरेश से पूंछा की ये तुम्हारी कुल्हाड़ी है सुरेश ने फिर मना कर दिया।

लक्ष्मी ने फिर पानी में डुबकी लगाई और अबकी लोहे की कुल्हाड़ी बहार निकाली सुरेश बहुत खुश हुआ और उसने लक्ष्मी से कहा यही मेरी कुल्हाड़ी है लक्ष्मी बहुत खुश हुई और सुरेश की ईमानदारी देख उससे तीनो कुल्हाड़ी दे दी।

फिर सुरेश तीनो कुल्हाड़ी लेकर घर जा रहा था। तो रस्ते में उसे महेश ने देख लिया और फिर सुरेश का पीछा करने लगा सुरेश ने घर जाकर सारी बात अपनी पत्नी को बताई। महेश ने सारी बात सुन ली। अगले सुबह सुरेश सोने की कुल्हाड़ी बेंच आया और पैसे वाला हो गया। मगर सुरेश ने अपना काम नहीं छोड़ा और बह फिर लकड़ी काटने जाने लगा।

एक दिन महेश ने भी सुबह – सुबह अपनी कुल्हाड़ी उठाई और उसी नदी के पास चला गया। और जनपून्छ कर अपनी कुल्हाड़ी को नदी में फेंक दिया और रोने लगा तभी फिर लक्ष्मी प्रकट हुयी और महेश ने सब कुछ बता दिया लक्ष्मीने कहा मैं तुम्हारी कुल्हाड़ी ला कर दूंगी। लक्ष्मी ने पानी में डुबकी लगाई और महेश की लोहे की कुल्हाड़ी बहार निकल लक्ष्मी ने पूंछा ये तुम्हारी कुल्हाड़ी है। महेश ने मना कर दिया ये देख लक्ष्मी को बहुत गुस्सा आया और कहा मुझ से झूट बोलते हो ये कह कर लक्ष्मी बहां से चली गई। और महेश को उसकी कुल्हाड़ी  नहीं मिली।

दोस्तों मुझे उम्मीद है आपको हमारी ईमानदार लकड़हारा – moral stories for students in hindi. की कहानी पसंद आयी होगी अगर पसंद आयी हो तो हमे कमेंट कर जरूर बताना। 

 

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